ये इस ब्लॉग में मेरा पहला पोस्ट है। मकसद इस बार थोड़ा अलग है। मुझे कई बार टूरिस्ट एक्सपर्ट बन कर घूमने का मौका मिला है। मैंने सोचा अपने इस अनुभव को थोड़ा सांझा कर लेता हूँ। मैं अपने इस पोस्ट की शुरआत हिमाचल प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध हिल स्टेशन से करूंगा। तो आज की पहली जगह है सोलन। चलिए सोलन के बारे में थोड़ा जान लेते है
सोलन चंडीगढ़ -शिमला हाइवे पर बसा हुआ एक छोटा सा जिला है। जो लगभग चंडीगढ़ और शिमला के ठीक बीचोबीच स्थित है। सोलन का नाम शूलनि देवी के नाम पर रखा गया है। सोलन में हर साल गर्मियों में जून के महीने में शूलनि देवी का मेला लगता है जो तीन दिन तक चलता है । तो जाहिर सी बात है की सोलन का सबसे प्रमुख आकर्षण का केंद्र यही मंदिर है। सोलन लगभग समुंद्रतल से 1600 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यहाँ सर्दियों में ठण्ड काफी होती है। सर्दियों में यहाँ तापमान शून्य से भी निचे चला जाता है। यहाँ पर तापमान गर्मियों में 35 डिग्री सेंटीग्रेट तक चला जाता है। कही कही पर गर्मियों में थोड़ी पानी की दिक्कत हो सकती है। पर इतनी भी पानी की किल्लत नहीं है। यदि आप सोलन बारिश के दिनों आते है तो आप सोलन हरियाली और प्रकृतिक सौंदर्य का भरभूर मज़ा ले सकते है।
आप सोलन के लिए कालका (हरियाणा ) से टॉय ट्रैन से सफर कर सकते है यदि पहाड़ो का सही मांयने में आन्नद लेना है तो या फिर चंडीगढ़ सेक्टर 43 बस स्टैंड से सीधे सोलन की बस ले सकते है। शिमला जाने वाली सभी बसें सोलन से होकर निकलती है। बस ध्यान रहे की कुछ बसें कालका होती हुई जाती है जिसमे समय ज्यादा लगता है तो आप उन्ही बसों को उपयोग करे जो कालका बाईपास होकर जाती है। यदि आप दिल्ली से जा रहे है तो आपको सीधे सोलन की बस मिलजाएगी। सामान्य व् वॉल्वो दोनों बस सर्विसेज मौजूद है।
अब बात करते है सोलन में घूमने लायक जगह की, सोलन कम भीड़भाड़ वाला हिल स्टेशन है आप की दिलचस्पी वाकई पहाड़ो में है तो सोलन ऐसे पर्यटकों के लिए है। आप सोलन में माल रोड घूम सकते है। माल रोड पर आपको खाने पीने की कुछ अच्छी जगह मिल जाएगी खासकर शाम के वक्त पर्यटक यहाँ मोमोस का स्वाद चख सकते है। यदि आप मॉल रोड पर घूम रहे है रोड के दूसरे छोर पर जहा पुराना बस स्टैंड है , ठीक उसी बस स्डैंड के सामने से लक्कड़ बाजार में प्रवेश कर सकते है।
लक्कड़ बाजार यहाँ का पुराना बाजार है। यही आप वास्तविक सोलन को अनुभव कर सकते है। लक्कड़ बाजार में कुछ हलवाइयों की दुकाने भी है जहा आप छोले भटूरे , समोसा और पकोड़ो का आन्नद ले सकते है। सोलन में पकोड़े काफी स्वादिष्ट मिलते है। सोलन मे पकोड़ो के अतिरिक्त मीठे में अलसी के लड्डू खा सकते है। चाहे तो घर के लिए ले सकते है। लक्कड़ बाजार में जूते व ऊनी कपड़ो की भरमाकर है। बाकी वही सब है जो एक शहर में होता है.
सोलन जठोली के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह प्राचीन शिव मंदिर राजगढ़ रोड पर सोलन से लगभग 5 km की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर से जुडी हुईं कई दन्तकथाएं है। ऐसा भी माना जाता है की यह एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर है। मंदिर की बनावट देखने लायक है। जठोली मंदिर के रास्ते में ही एक शिरडी साई का मंदिर हैं। यह मंदिर भी दर्शनीय है। जब आप जठोली तक जाये तो इससे थोड़ा ही आगे जीरो पॉइंट है , वहा आप नेचर का नज़ारा देख सकते हो।
यही जठोली से आगे की ओर बॉन मोनास्ट्री भी है। देखने लायक जगह है। यहाँ के स्थानीय लोगो का कहना है की यह विश्व की दूसरी सबसे पुरानी मोनेस्ट्री है। इसके पीछे तथ्य यह है की बॉन समुदाय बौद्ध से भी पुराना है। मान्यता के अनुसार इस मोनेस्ट्री के चारो ओर घडी की दिशा में यानि क्लॉक वाइज घूमना पवित्र माना जाता है
एक बात विशेष याद रखियेगा जिस दिन जठोली जाए वो दिन पूरा जठोली रुट पर ही बिताये।
सोलन से लगभग 30 मिनट की दूरी पर मोहन हेरिटेज पार्क है आप यहाँ खूबसूरत दृश्य का लुफ्त उठा सकते है। पार्क में कई इमारते बनाई गयी है जो की हिन्दू आर्किटेक्ट और वैदिक शैली से निर्मित है। यही काली का टिब्बा भी स्थित है। इस भी यहाँ का प्रसिद्ध तीर्थ है। पार्क हरियाली से भरपूर है।
यही यहाँ के प्रमुख आकर्षण के केंद्र है। आप यहाँ गिरघाट भी घूम सकते है।
रहने लिए आपको यहाँ होटल ,रेस्टहाउस और डोरमेट्री भी मिल जायेगा। अगर आप सोलन मेँ 2 -3 दिन बिताना चाहते है तो कोटलानाला पर किसी भी होटल मे स्टे कर सकते है। जो इन्तज़ार किस बात का है जाइए मज़ा लीजिये सोलन का।
अधिक जानकारी के लिए आप ई मेल कर सकते है।
anilksingh.prof@gmail.com
सोलन चंडीगढ़ -शिमला हाइवे पर बसा हुआ एक छोटा सा जिला है। जो लगभग चंडीगढ़ और शिमला के ठीक बीचोबीच स्थित है। सोलन का नाम शूलनि देवी के नाम पर रखा गया है। सोलन में हर साल गर्मियों में जून के महीने में शूलनि देवी का मेला लगता है जो तीन दिन तक चलता है । तो जाहिर सी बात है की सोलन का सबसे प्रमुख आकर्षण का केंद्र यही मंदिर है। सोलन लगभग समुंद्रतल से 1600 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यहाँ सर्दियों में ठण्ड काफी होती है। सर्दियों में यहाँ तापमान शून्य से भी निचे चला जाता है। यहाँ पर तापमान गर्मियों में 35 डिग्री सेंटीग्रेट तक चला जाता है। कही कही पर गर्मियों में थोड़ी पानी की दिक्कत हो सकती है। पर इतनी भी पानी की किल्लत नहीं है। यदि आप सोलन बारिश के दिनों आते है तो आप सोलन हरियाली और प्रकृतिक सौंदर्य का भरभूर मज़ा ले सकते है।
आप सोलन के लिए कालका (हरियाणा ) से टॉय ट्रैन से सफर कर सकते है यदि पहाड़ो का सही मांयने में आन्नद लेना है तो या फिर चंडीगढ़ सेक्टर 43 बस स्टैंड से सीधे सोलन की बस ले सकते है। शिमला जाने वाली सभी बसें सोलन से होकर निकलती है। बस ध्यान रहे की कुछ बसें कालका होती हुई जाती है जिसमे समय ज्यादा लगता है तो आप उन्ही बसों को उपयोग करे जो कालका बाईपास होकर जाती है। यदि आप दिल्ली से जा रहे है तो आपको सीधे सोलन की बस मिलजाएगी। सामान्य व् वॉल्वो दोनों बस सर्विसेज मौजूद है।
अब बात करते है सोलन में घूमने लायक जगह की, सोलन कम भीड़भाड़ वाला हिल स्टेशन है आप की दिलचस्पी वाकई पहाड़ो में है तो सोलन ऐसे पर्यटकों के लिए है। आप सोलन में माल रोड घूम सकते है। माल रोड पर आपको खाने पीने की कुछ अच्छी जगह मिल जाएगी खासकर शाम के वक्त पर्यटक यहाँ मोमोस का स्वाद चख सकते है। यदि आप मॉल रोड पर घूम रहे है रोड के दूसरे छोर पर जहा पुराना बस स्टैंड है , ठीक उसी बस स्डैंड के सामने से लक्कड़ बाजार में प्रवेश कर सकते है।
लक्कड़ बाजार यहाँ का पुराना बाजार है। यही आप वास्तविक सोलन को अनुभव कर सकते है। लक्कड़ बाजार में कुछ हलवाइयों की दुकाने भी है जहा आप छोले भटूरे , समोसा और पकोड़ो का आन्नद ले सकते है। सोलन में पकोड़े काफी स्वादिष्ट मिलते है। सोलन मे पकोड़ो के अतिरिक्त मीठे में अलसी के लड्डू खा सकते है। चाहे तो घर के लिए ले सकते है। लक्कड़ बाजार में जूते व ऊनी कपड़ो की भरमाकर है। बाकी वही सब है जो एक शहर में होता है.
सोलन जठोली के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह प्राचीन शिव मंदिर राजगढ़ रोड पर सोलन से लगभग 5 km की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर से जुडी हुईं कई दन्तकथाएं है। ऐसा भी माना जाता है की यह एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर है। मंदिर की बनावट देखने लायक है। जठोली मंदिर के रास्ते में ही एक शिरडी साई का मंदिर हैं। यह मंदिर भी दर्शनीय है। जब आप जठोली तक जाये तो इससे थोड़ा ही आगे जीरो पॉइंट है , वहा आप नेचर का नज़ारा देख सकते हो।
यही जठोली से आगे की ओर बॉन मोनास्ट्री भी है। देखने लायक जगह है। यहाँ के स्थानीय लोगो का कहना है की यह विश्व की दूसरी सबसे पुरानी मोनेस्ट्री है। इसके पीछे तथ्य यह है की बॉन समुदाय बौद्ध से भी पुराना है। मान्यता के अनुसार इस मोनेस्ट्री के चारो ओर घडी की दिशा में यानि क्लॉक वाइज घूमना पवित्र माना जाता है
एक बात विशेष याद रखियेगा जिस दिन जठोली जाए वो दिन पूरा जठोली रुट पर ही बिताये।
सोलन से लगभग 30 मिनट की दूरी पर मोहन हेरिटेज पार्क है आप यहाँ खूबसूरत दृश्य का लुफ्त उठा सकते है। पार्क में कई इमारते बनाई गयी है जो की हिन्दू आर्किटेक्ट और वैदिक शैली से निर्मित है। यही काली का टिब्बा भी स्थित है। इस भी यहाँ का प्रसिद्ध तीर्थ है। पार्क हरियाली से भरपूर है।
यही यहाँ के प्रमुख आकर्षण के केंद्र है। आप यहाँ गिरघाट भी घूम सकते है।
रहने लिए आपको यहाँ होटल ,रेस्टहाउस और डोरमेट्री भी मिल जायेगा। अगर आप सोलन मेँ 2 -3 दिन बिताना चाहते है तो कोटलानाला पर किसी भी होटल मे स्टे कर सकते है। जो इन्तज़ार किस बात का है जाइए मज़ा लीजिये सोलन का।
अधिक जानकारी के लिए आप ई मेल कर सकते है।
anilksingh.prof@gmail.com
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